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हास्य जीवन का अनमोल तोहफा    ====> हास्य जीवन का प्रभात है, शीतकाल की मधुर धूप है तो ग्रीष्म की तपती दुपहरी में सघन छाया। इससे आप तो आनंद पाते ही हैं दूसरों को भी आनंदित करते हैं।

हँसे और बीमारी दूर भगाये====>आज के इस तनावपूर्ण वातावरण में व्यक्ति अपनी मुस्कुराहट को भूलता जा रहा है और उच्च रक्तचाप, शुगर, माइग्रेन, हिस्टीरिया, पागलपन, डिप्रेशन आदि बहुत सी बीमारियों को निमंत्रण दे रहा है।

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शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

पठान का डंडा और मामला ठंडा

pathan उपदेश और नसीहतों के बीच कभी कभी थोडा हंस भी लेना चाहिए. 
किसी गाँव मैं एक साहब ने खुद के भगवान् होने का  का एलान कर दिया,कहने लगे कि वो भगवान् हैं. दूर दूर से लोग आते और उसको समझाते कि तुम ग़लत हो, दूर देश से धर्म के ज्ञानी बुलाये गए लेकिन वो मान ने को तैयार नहीं कि वो खुदा नहीं है.
वहीं गाँव मैं एक दुखी पठान रहता था . दुखी इस लिए कि उसका बेटा अभी कुछ दिनों पहले चल बसा था. उसने भी यह बात सुनी कि एक साहब ने भगवान् होने का  दावा कर दिया है. उस पठान ने कुछ सोंचा और अपनी लाठी हाथ मैं ले के उन साहब से मिलने गया.
वहां देखा लोग उसको समझा रहे हैं, पठान ने सब से कहा , मुझे भी एक मौक़ा दो इन भगवान् जी से मिलने का. सब मान गए. 
पठान ने पूछा तो आप खुद को भगवान् कहते हैं?
उन साहब का जवाब था हाँ.
पठान के डंडा ऊपर उठाया और कहा "तो तुम्ही हो जिसने मुझसे मेरा बेटा छीन लिया" 
इस से पहले कि पठान आगे बढ़ता उन साहब ने चिल्ला के कहा  नहीं भाई मैं ना तो भगवान् हूँ और ना ही मैंने तुम्हारा बेटा छीना है..