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हास्य जीवन का अनमोल तोहफा    ====> हास्य जीवन का प्रभात है, शीतकाल की मधुर धूप है तो ग्रीष्म की तपती दुपहरी में सघन छाया। इससे आप तो आनंद पाते ही हैं दूसरों को भी आनंदित करते हैं।

हँसे और बीमारी दूर भगाये====>आज के इस तनावपूर्ण वातावरण में व्यक्ति अपनी मुस्कुराहट को भूलता जा रहा है और उच्च रक्तचाप, शुगर, माइग्रेन, हिस्टीरिया, पागलपन, डिप्रेशन आदि बहुत सी बीमारियों को निमंत्रण दे रहा है।

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रविवार, 28 अगस्त 2011

भाग्यवान लड़की के मामले में तुम थोडा लेट हो........अरशद अली

लड़की वाले डरे-डरे से थे...
लड़के वाले हरे-भरे से थे..
हाँथ में थाल लिए कन्या जैसे आई
लड़के की माँ, पति पर चिल्लाई
मुझे सातवीं बार वही लड़की दिखला रहे हो
जगह बदल बदल कर एक हीं घराने में आ रहे हो

पति झुंझला गया
अपनी औकात पर आ गया
कहा,
भाग्यवान लड़की के मामले में तुम थोडा लेट हो...
क्या करोगी जब मामला पहले से सेट हो..
हर बार लड़की देख कर कहती हो
लड़की काली है
यही काली लड़की तुम्हारे बेटे के बच्चे की माँ बनने वाली है

श्रीमती बोली, मुझे उम्मीद नहीं था बेटे की नादानियों पर
तुम भी गुल खिलाओगे
अगर शादी यहाँ करोगे तो दहेज़ में क्या पाओगे?

लड़की चुप्पी तोड़ कर कही,
सासु अम्मा ...आज-कल में ले चलिए तो गाड़ी,फ्रीज़,टीवी
सब ले जाइएगा
चार महीने अगर लेट करियेगा तो दहेज़ में
एक पोता भी पाइयेगा

गुरुवार, 11 अगस्त 2011

आज कल 2nd हैण्ड जूता भी 200 में आता है .....अरशद अली

पुत्र ने पिता से पूछा,
पापा मुनाफा किसे कहते हैं?
पिता ने सरलता से कहा,
कोई बस्तु कम कीमत का हो
और अधिक मूल्य में बीक जाता है
तो जो अतिरिक्त धन प्राप्त होता है
वही मुनाफा है.

पुत्र ने कहा,
तब तो मुझे मुनाफा कमाना आ गया
असल में चौकीदार को आपका जूता भा गया
कल आप मम्मी पर जूते को लेकर
चिल्ला रहे थे
तुम्हारे बाप का दिया दहेजुआ जूता
एक कौड़ी का है बतला रहे थे...

मैंने उसी एक कौड़ी के जूते को
चौकीदार से 20 रूपया में बेच दिया हूँ
और एक कौड़ी के जूते पर
कई रूपया मुनाफा लिया हूँ

पिता ने कहा,
मुर्ख के बच्चे
वो जूता तो तुम्हारी माँ से
लड़ने का एक बहाना था..
उसे हीं बेच कर तुम्हे मुनाफा कमाना था?

जरुर तुम्हारी माँ ने ये सिखलाया होगा
तुम्हारे हाथ से उसी ने जूता बिकवाया होगा

पुत्र बोला,नहीं -नहीं
चौकीदार कुछ दिनों से नंगे पाँव
काम पर आ रहा था
कल देखा वो थोडा लंगड़ा रहा था
पूछने पर कहा ...
छोटे साहब जूता कहीं ग़ुम हो गया
2nd हैण्ड खरीदने के लिए भी पैसा कम हो गया
तभी मुझे आपके जूते बेचने का ख्याल आया
मेरे इस व्यवसाय को माँ ने नहीं सिखलाया

पिता ने कहा,
माँ के पक्षधर ,तुम्हारे इस व्यवसाय में
मुनाफा नहीं घाटा है
आज कल 2nd हैण्ड जूता भी 200 में आता है

सुनते हीं पुत्र ने पुनः एक प्रश्न दागा...
मुनाफा कैसे घाटा बन जाता है ?
और ये घाटा किसे कहा जाता है ?

पिता ने कहा,
इस प्रश्न का उत्तर ना हीं जानो तो अच्छा है
शादी से पहले तुम्हारी माँ मुनाफा,
शादी के बाद घाटा..
और इस घाटे का चक्रब्रिधि-ब्याज
तुम्हारे जैसा बच्चा है



रविवार, 1 मई 2011

प्यार तुम्हारा झाड़ू-बेलन ........अरशद अली

ऐसे तो मै हास्य पर लिखता नहीं हूँ मगर मेरी पहली कविता इस मंच पर पसंद किया गया ...आप सभी के लिए
मेरी एक और कविता
इस कविता को पढ़ कर आनंद लें.

तुमने कहा,मान गया गर
तो प्यार तुम्हारा ,गुलाब-जामुन
अगर न माना तेरे कहने को
तो प्यार तुम्हारा झाड़ू-बेलन

खट-खट खट-खट
खीट पीट खीट पीट
हँस कर सहा तो सुन्दर यौवन
नज़र घुमाया,तुम्हे भुलाया
फिर प्यार तुम्हारा झाड़ू-बेलन

गिफ्ट जब लाया,गुलाब लगाया
कुछ क्षण गुज़रा हँस कर जीवन
भूल गया जब तेरे जन्म दिवस को
फिर प्यार तुम्हारा झाड़ू-बेलन

खरा उतरा जब हर वादे पर
स्वर्ग सी अनुभूति तेरा छुवन
जब टूट गया कोई वादा मुझसे
फिर प्यार तुम्हारा झाड़ू-बेलन

हँस कर मिला तो हँस कर लौटा
प्रसन्न रहा फिर दिन भर ये मन
जैसे हीं कुछ कमी गिनाया
फिर प्यार तुम्हारा झाड़ू-बेलन

हर जुर्म सहा तेरे प्यार में
हँसता रहा हर समय मै बेमन
अब तो आदत है लेने की
प्यार में तेरे झाड़ू-बेलन .....


---अरशद अली---

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

बेवकूफ पत्नी से डरना चालाक पतियों की चतुराई है ..........अरशद अली

शर्मा जी आधुनिकता का मजाक उड़ा रहे थे.
आँखे गोल-गोल नचा रहे थे

तभी फोन घनघना गया
भरी मीटिंग को एक कॉल खा गया

फोन उठते हीं मिसेज शर्मा ने नमस्कार किया
अनमने ढंग से शर्मा जी ने नमस्कार सिव्कार किया

पत्नी का एक तुगलकी फरमान आया था
शाम में बच्चों को घुमाने ले जाना है,याद कराया था

मैंने पूछा

मिसेज शर्मा तो बड़ी शालीनता से बात कह गयीं

शर्मा जी कहे,

पत्नी की शालीनता एक तरह की शामत है.....
कहते हीं शर्मा जी चुप हो गए

पूछा विषय तो अच्छा चुना है,मौन क्यों धारण कर गए

शर्मा जी कहे,

जैसे वाक्य कहा पत्नी का ख्याल आ गया
अच्छा आप भी अन्य पतियों की तरह ,पत्नी से डर गए

कौन कहता है ,सारे पती डरते हैं
पत्नी तो डराने के लिए हीं बनी है

मगर चालाक पती तो डरने का नाटक करते हैं

पूछा ,चलिए नाटक हीं सही
अब इस नाटक का कारण तो बतलाइये

शर्मा जी ने कहा,

शादी के बाद हर शेर को सवा शेर मिल जाता है
हेकड़ी पती करे या पत्नी,चोट तो पती को हीं आता है

अतः पत्नी के दहाड़ का उत्तर मिमिया के देने में भलाई है
बेवकूफ पत्नी से डरना चालाक पतियों की चतुराई है

चलिए बात को यहीं बिराम देता हूँ
पत्नी ने जल्दी बुलाया है इसी बात पर ध्यान देता हूँ

अन्यथा इस बात पर पत्नी को चिल्लाना होगा
खामखा मुझे उसके सामने फिर से मिमियाना होगा...


---अरशद अली---