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हास्य जीवन का अनमोल तोहफा    ====> हास्य जीवन का प्रभात है, शीतकाल की मधुर धूप है तो ग्रीष्म की तपती दुपहरी में सघन छाया। इससे आप तो आनंद पाते ही हैं दूसरों को भी आनंदित करते हैं।

हँसे और बीमारी दूर भगाये====>आज के इस तनावपूर्ण वातावरण में व्यक्ति अपनी मुस्कुराहट को भूलता जा रहा है और उच्च रक्तचाप, शुगर, माइग्रेन, हिस्टीरिया, पागलपन, डिप्रेशन आदि बहुत सी बीमारियों को निमंत्रण दे रहा है।

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मंगलवार, 22 मार्च 2011

"ढाक के तीन पात" का क्या अर्थ है?

पति: आज खाने में क्या बनाओगी?
पत्नि: जो आप कहें
पति: वाह, ऐसा करो आज दाल चावल बना लो।
पत्नि: अभी कल ही तो खाया था।
पति: तो सब्जी रोटी बना लो!
पत्नि: बच्चे नहीं खायेंगे।
पति: छोले पूरियां बना लों, कुछ चेंज हो जायेगा।
पत्नि: मुझे भारी भारी लगता है
पति: ओके, आलू कीमा बना लो
पत्नि: आज मंगलवार है मीट की दुकान बंद होगी।
पति: तो गोभी के पराठें बना लो।
पत्नि: सुबह यही तो खाये थे।
पति: चलो, आज होटल से खाना मंगवा लेते हैं।
पत्नि: इस महंगाई में रोज रोज बाहर से खाना मंगाना ठीक नहीं।
पति: तो एक काम करो कढ़ी चावल बना लो।
पत्नि: अब इस वक्त दही कहां मिलेगा।
पति: ...पुलाव बना लो...
पत्नि: इसमें बहुत टाइम लगता है
पति: पकोड़े बना लो, इसमें टाइम नहीं लगता
पत्नि: खाने के टाईम पर पकोड़े अच्छे नहीं लगते
पति: फिर क्या बनाओगी ?
पत्नि: मेरा क्‍या है.... जो आप कहें।
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पि‍ता पुत्र से - आज तक तुमने कोई ऐसा काम कि‍या जि‍ससे मेरा सि‍र ऊंचा होता हो ?
पुत्र - आप भूल गये पि‍ता जी... याद करि‍ये परसों ही तो टीवी देखते समय जब आपने लेटना चाहा तो मैंने आपके सि‍र के नीचे दो तकि‍ये लाकर रखे थे।