
होली के दिन जनमाएक नेता का बेटा,मुसीबत बन गयाचैन से नहीं लेटा ? पैदा होते हीकमाल कर गया,उठा, बैठा औरनेता की कुर्सी पर चढ़ गया ! यह देख डॉक्टर घबराई, बोली – ये तो अजूबा है !इसके सामने तोसाइंस भी झूठा है !!इसे पकड़ो और लिटाओदुधमुंहा शिशु है, माँ का दूध पिलाओ । दूध की बात सुनकर शिशु ने फुर्ती दिखाई,पास खड़ी नर्स कीपकड़ी कलाईबोला – आज तो होली है,ये कब काम आएगी,काजू-बादाम की भंगअपने हाथों से पिलाएगी । नेता और डॉक्टर के समझाने पर भी वह नहीं माना,चींख-चींखकर अस्पताल सिर पर उठाया,और गाने लगा ‘शीला’ का गाना ! उसके बचपने में‘शीला की ज़वानी’ छा गई,‘मुन्नी बदनाम न होइसलिए नर्स भंग की रिश्वत लेकर आ गई ! शिशु को भंग पीता देख नेताजी घबराये और...