मंच पर सक्रिय योगदान न करने वाले सदस्यो की सदस्यता समाप्त कर दी गयी है, यदि कोई मंच पर सदस्यता के लिए दोबारा आवेदन करता है तो उनकी सदस्यता पर तभी विचार किया जाएगा जब वे मंच पर सक्रियता बनाए रखेंगे ...... धन्यवाद   -  रामलाल ब्लॉग व्यस्थापक

हास्य जीवन का अनमोल तोहफा    ====> हास्य जीवन का प्रभात है, शीतकाल की मधुर धूप है तो ग्रीष्म की तपती दुपहरी में सघन छाया। इससे आप तो आनंद पाते ही हैं दूसरों को भी आनंदित करते हैं।

हँसे और बीमारी दूर भगाये====>आज के इस तनावपूर्ण वातावरण में व्यक्ति अपनी मुस्कुराहट को भूलता जा रहा है और उच्च रक्तचाप, शुगर, माइग्रेन, हिस्टीरिया, पागलपन, डिप्रेशन आदि बहुत सी बीमारियों को निमंत्रण दे रहा है।

बुधवार, 25 मई 2022

अब कोई लिखता नही इस मंच पर

 पूरे 10 वर्षों बाद आज इस मंच पर आया।

 थोड़ी पीड़ा हुई ।

कोई लिखता नहीं अब इस मंच पर।

 मैं अन्य को क्यों बोलूं मैं भी तो बहुत दिनों के बाद लौटा हूं।

 अब मैं इस हास्य व्यंग मंच को हर दूसरे दिन एक रचना दूंगा और आप सभी से आग्रह करूंगा कि आप भी इस मंच को जिंदा रखने में मदद करें।

Arshad Ali 

सोमवार, 19 नवंबर 2012



                                   
                                      
                   

गणित के अध्यापक ने एक विध्यार्थी से पूछा -

                             

                   यदि तुम्हारे पास 12 चॉकलेट हों,                                     
                                     
                                     
                   और उसमें से तुमने,


                   5 जेनी को दिए,


                   3 रूमा को दिए,


                   और 4 रफीक को दिए,


                   तो तुम्हारे पास क्या बचेंगे  ???


                   विध्यार्थी ने बेझिझक तुरंत जवाब दिया-


                   सर.... तींन गर्ल फ्रेंड.
                                      ृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृृ                         

                                      एम.आर.अयंगर. 


मंगलवार, 13 नवंबर 2012

Municiplity ka pani....









Teacher: Water ka formula batao



Student: H2O MgCl2 CaSO4 AlCl3 NaOH 


HNO3 H2SO4 HCl CO2



Teacher: Ye kya hai?


Student: Sir ye Municipality ka pani 





hai..! :)

बुधवार, 29 अगस्त 2012

वैसे तो टीटोटालर हूँ...



वैसे तो टीटोटालर हैं...

दारू शराब सब लत ही है,
करती खराब दौलत ही है,
होता है असर सेहत पर भी
पड़ती है मगर आदत फिर भी,

जब मुफ्त मिलेगी तो यारों,
क्यों हद की बात करो यारों,
जितनी आती है आने दो,
ऐसे ही रात बिताने दो.

फोकट में मिलेगी तो बोलो,
जो भी हो बोतल खोलो,
कुछ फर्क नहीं पड़ता हम-दम,
हो ठर्रा विस्की या हो रम.

काजू किशमिश तो आएँगे,
अंडे, नमकीन मँगाएँगे,
चिल्ली-चिकन भी मँगवालो,
फ्राई-पनीर भी करवालो.

जब तक जेबें हैं भारी,
कब कौन कहाँ है लाचारी, मेरी
अंटी को हाथ लगाना मत,
आंटी को कुछ बतलाना मत.

दो चार पेग जो बढ़ जाएँ,
थोड़ी मुश्किल में पड़ जाएँ,
वो बने डाक्टर बैठे हैं,
क्यों फीस ये इतने ऐँठे हैं.

ये दवा ठीक कर जाएँगे,
पैसे वापस मिल जाएँगे,
फिर हर्ज ही क्या है पीने में,
मस्ती मस्ती में जीने में.

बस एक बात का ध्यान रहे,
अपने बड़ों का मान रहे,
माँगो मत पैसे खाने के,
पीने और पिलाने के.

वैसे तो टीटोटालर है...

एम.आर.अयंगर. /  290812.

रविवार, 22 जुलाई 2012

गाँधीजीबचिए !!!!!!!! राष्ट्रपिता या भारत रत्न ?????


तमाम बचपन बापूजी को राष्ट्रपिता जाना.

कुछेक समय पहले किसी बिटिया ने सवाल किया - 

बापूजी को राष्ट्रपिता का संबोधन देने वाले कागजात पेश करें.

सरकार मूक रह गई.

अब सरकार ने खुलासा किया कि बापू को 'राष्ट्रपिता'  

का   संबोधन औपचाकिक तौर पर दिया ही नहीं गया.

मुझे डर है कि यह सरकार अपने उधेड़बुन में बचने बचाने के लिए ............... 

आपको भारत रत्न से सम्मानित न कर दे.

इनके समझ से परे है कि भारत के राष्ट्रपिता ,  

भारत रत्न  कैसे हो जाएंगे ????

सरकार अपनी हँसी  न ही उड़ाए तो बेहतर होगा. !!!!!!!


अयंगर.
9425279174.

सोमवार, 14 मई 2012

भाषा


                                        
                                हिंदी.....


                               आज ही एक मित्र से सूचना दी ...


                               कि ..  हिंदी






                              राजनीतिज्ञों  ने इसे राष्ट्रभाषा बनाना चाहा...... 


                              नहीं बन सकी...


                             संविधान कर्मियों ने इसे राजभाषा बनाना चाहा...


                             कानूनन तो बन गई पर ...


                             पर लोगों के दिलों में जगह न पा सकी...
     
                             ऊपर वाले की मेहरबानियों से .........


                             हमारी मातृभाषा नहीं बन सकी...


                             पर हाय री किस्मत ....


                             यह मात्र भाषा रह गई...






                              एम.आर.अयंगर.
                              9425279174.

बुधवार, 11 अप्रैल 2012

राष्ट्र ....

                                           


                                             हमारे देश में ...

                                             एक राष्ट्र पिता हैं...

                                             और एक राष्ट्र पति ....

                                             ......... राष्ट्र.........

                                            एक बच्चे ने तो पूछ ही लिया कि

                                            महात्मा को राष्ट्र पति बनाने के रिकॉर्ड बताएं ..

                                            सरकार के पास कुछ भी तो नहीं मिला...

                                            नाम से तो यही प्रतीत होता है कि राष्ट्रपति राष्ट्रपिता के दामाद हैं...

                                            अब तो राष्ट्रपति भी नारी हैं...
                                   
                                            इसका विष्लेषण कैसे करें...





                                          एम.आर अयंगर. 

रविवार, 25 मार्च 2012

ये बताओ दुनिया का सबसे बड़ा जानवर कौन है?........अरशद अली

मिसेज़ शर्मा परेशान हैं ..
पत्नी ने धीरे से कहा

मैंने पूछा क्यों?

पत्नी ने कहा अपने बच्चों को लेकर
चिंतीत हैं

मैंने पुनः पूछा क्यों?

पत्नी ने कहा
बच्चे हाज़िर ज़वाब हो गए हैं

मैंने कहा
इसमें चिंता के क्या बात है
बच्चे हैं उनके अपने भी ज़ज्बात हैं
देखता हूँ समय पर स्कूल आते जाते हैं
सभी से तमीज़ से पेश आते हैं
तुम औरत खामखा की आफत हो
चिंतीत हीं रहती हो जब सब कुछ सलामत हो

पत्नी कही
नहीं-नहीं तुम समझ नहीं रहे हो
और ना हीं समझ पाओगे
आज मिसेज़ शर्मा को चाय पर बुलाई हूँ
बच्चे कैसे हैं तुम भी जान जाओगे

तयशुदा कार्यक्रम के तहत
मिसेज़ शर्मा अपने तीनो बच्चों के साथ आ गयीं
बच्चों की मुस्कराहट मुझे भा गयी
मैंने कहा भाभी जी,आपने बच्चों को
अच्छे संस्कार सिखलाएँ हैं
आपके पास तो हर मर्ज़ की दवाएं हैं

मिसेज़ शर्मा ने कहा,
नहीं भाई साहब बच्चों में एक नयी तरह की उमंग है
मै, मेरा पूरा परिवार इन तीनों से तंग है

मैंने कहा छोडिये मै बच्चों से हीं बात करता हूँ

सबसे पहले छोटे बच्चे "छोटू" से कहा,
तुम तो बहुत अच्छे लग रहे हो
तीनों में तुम सबसे शरीफ बच्चे लग रहे हो
चलो मेरे कुछ प्रश्नों का उत्तर दे दो
इससे पहले आरिज़ भैया (बेटा) के अलमारी से कोई भी खेलौना ले लो
छोटू अलमारी से एक हाथी निकल लाया

मैंने पूछा, बेटा ये बताओ दुनिया का सबसे बड़ा जानवर कौन है?
छोटू झटपट कहा "चूहा"
कैसे पूछने पर कहा
बस इतना हीं जनता हूँ.

मैंने कहा कोई बात नहीं, चलो एक पंछी का नाम बताओ
जो काला होता है?
छोटू बोला नाम तो नहीं पता मगर जानता हूँ कैसे बोलता है
मैंने पूछा कैसे बोलता है यही बताओ
छोटू बोला कावं-कावं

उत्तर सुन कर मिसेज़ और मिसेज़ शर्मा मुस्कुरा रहीं थी
असल में वो मेरी हसी उडा रही थीं

मैंने माहोल देख कर एक प्रश्न और दागा

भों-भों कौन सा जानवर बोलता है ये तो तुम ज़रूर जानते होगे
छोटू कहा,हाँ अंकल इसका भी उत्तर जानता हूँ
मैंने कहा बताओ

छोटू बोला पड़ोस के अंकल के घर में जो जानवर रहता है
वही भों-भों करता है
मैंने कहा ,बेटे उसी जानवर का नाम तो बताओ
छोटू बोला "मोती"

छोटू का उत्तर मेरी जिज्ञासा कम कर कर गया
मै अपने अन्दर की व्यथा हज़म कर गया
इसी क्रम में एक प्रश्न और कर गया
अच्छा छोटू में...में ...कौन बोलता है?

छोटू ने कहा, अभी तो आप हीं बोल रहें हो
उसके बाद मम्मी पापा से मेरा
शिकायत लगाने के क्रम में घर पर बोलेगी..
फिर पापा में..में...करेंगे
अंकल आप हीं बताइए
में...में ... से बच्चे डरेंगे ?

इतना सुनते हीं मै चुप हो गया

थोड़ी देर के बाद कहा, भाभी जी मै भाई साहब से मिल कर बात करता हूँ
बच्चों को समझाने का उनसे मिल कर प्रयास करता हूँ

मिसेज़ शर्मा ने कहा,
भाई साहब आप चिंता मत करें बच्चे सुधर हीं जायेंगे..अभी नयें हैं
आप इनके पापा से मत मिलिए ये बच्चे उनपर हीं गएँ हैं.


अरशद अली

शुक्रवार, 9 मार्च 2012

मुलायम की माया !!!


MAYA AND MULAYAM


WAH KYA BAAT HAI.....

MULAYAM KI MAYA MEIN MAYA MULAYAM HO GAYI.
वाह क्या बात है !!!!!

मुलायम की माया से माया मुलायम हो गई...

Iyengar.

मुलायम की माया...


MAYA AND MULAYAM


WAH KYA BAAT HAI.....

MULAYAM KI MAYA MEIN MAYA MULAYAM HO GAYI.


वाह !!! क्या बात है...

मुलायम की माया से माया मुलायम हो गई..


Iyengar.

बुधवार, 15 फ़रवरी 2012

बिछना - भबिछाना



बिछना - बिछाना

जमाना बदल रहा है.
काफी बदल गया है.
लेकिन बिछने की आदत अभी कायम है.
पहले आँखें बिछाते थे,
फिर कालीने बिछने लगीं ,
अब लोग खुद बिछ जाते हैं.

लोगों को फख्र महसूस होता है,
लोगों को हर्ष महसूस होता है,
कि अब हम न ही बिस्तर बिछाते हैं,
न ही हम कालीनें बिछाते हैं,
न ही नजरे इनायत बिछाई जाती है,
हम बिछाने में विश्वास नहीं करते ....

हम तो खुद ही बिछ जाते हैं.


एम.आर.अयंगर.
09425279174.

मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

कुछ तो लोग कहेंगे ...............अरशद अली




पुरानी धुन सुना तो ऐसा लगा की मेरे मन की छुपी बात को हीं गायक ने दुहराया है
कुछ तो लोग कहेंगे
लोगों का काम है कहना...............
आज पड़ोस के अंकल ने मुझसे कई साल बाद पूछ हीं लिया की मुझे अंकल क्यों कहते हो भैया कहा करो.
मेरा मन खुश था की मुझे अपने आस पास के लोग नोटिस तो करने लगे नहीं तो पहले कभी ऐसा कहाँ हुआ था की बचपन से जिन्हें देख कर बड़ा हुआ वो मुझसे रिक्वेस्ट कर के बात करे. आज मै अंकल को अंकल नहीं भैया कह कर अंपने बड़े होने पर गर्ब कर ही रहा था की आंटी पर नज़र पड़ गयी.आखे गोल कर अभी सोंच हीं रहा था की अंकल तो अभी अभी भैया बन गए अब आंटी को भाभी कह देने पर कोई सामाजिक परेशानी तो नहीं हो जाएगी...
कई बिचारों से गुजरते हूए इसी नतीजे पर पहुँचा की आंटी से हीं पूछ लेना बेहतर होगा,आंटी को थोड़ी देर पहले की बात बताने पर आंटी को गंभीर होते देख यही महसूस हुआ की आज मेरी, नहीं तो अंकल की सामत आई है.
अभी अभी माफ़ी मांगने वाला था की आंटी ने इतना कहा की मुझे मोहल्ले के लडको से भाभी सुनना बिलकुल पसंद नहीं,ऐसा करो तुम मुझे दीदी कह लिया करना.मै मन हीं मन सोंच रहा था की अजब उलझन है अंकल भैया हूए तो हूए आंटी दीदी बन कर रिश्तों के समीकरण में भूचाल लाने पर क्यों तुली हें.चलिए दुनिया तो हर हाल में मुझे अनाप सनाप कहेगी हीं .भले हीं रिश्तों में कोई तालमेल नहीं पर अंकल भैया आंटी दीदी के बीच में सोनू मोनू जो कल तक मुझे भैया कहते थे अब मुझे क्या कहेंगे????
अंकल के भैया सुनने की लालसा ने मुझे सोनू मोनू के भैया से अंकल बना डाला...

मै अपने को इस बात से मनाता रहा की

कुछ तो लोग कहेंगे .................................

मंगलवार, 3 जनवरी 2012

चिथड़ा-चिथड़ा सा कफ़न । (व्यंग गीत ।)





चिथड़ा-चिथड़ा  सा  कफ़न । 
(व्यंग गीत ।)


सड़े - गले   भ्रष्ट   नेता और  मेरे  मुन्ने   की   अम्मा,  
जैसे ही  एक  और  सवेरा  हुआ ? सब  याद  आ  गए..!!


अंतरा-१.


संसद का  गला  फाड़  निकम्मा, घर में  मुन्ने की अम्मा,
जैसे  ही   थैला  राशन  का   पकड़ा,    सब  याद  आ  गए..!!

जैसे  ही  एक   और   सवेरा  हुआ ?  सब   याद  आ  गए..!!


अंतरा-२.


मेरा  कटा  हुआ  पॉकेट, बीबी  का  बिका  हुआ  लॉकेट,  
जैसे  ही  मैंने ,जेब  में  हाथ ड़ाला ? सब याद आ गए..!!

जैसे ही  एक  और  सवेरा  हुआ ? सब  याद  आ  गए..!!


अंतरा-३.

कैसे  समझाऊँ  महँगाई का फंडा, मुन्ने  की अम्मा  को  ?
रात  को  दोनों, सो  गये थे  भूखे, अब  याद  आ  गए..!!

जैसे ही  एक  और  सवेरा  हुआ ? सब  याद  आ  गए..!!


अंतरा-४.


सूखा -सूखा  अधमरा  ये  बदन, चिथड़ा-चिथड़ा  सा  कफ़न,
मैं  और  देश, जब  ख़ड्डे में जा  गिरे ? सब  याद  आ  गए..!!

जैसे  ही   एक   और   सवेरा   हुआ ?   सब  याद  आ   गए..!!


मार्कण्ड दवे । दिनांक-०३-०१-२०१२.

MARKAND DAVE
http://mktvfilms.blogspot.com   (Hindi Articles)

शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

आधुनिक बोधकथाएँ. ७ - " मैं संसदताई । "




आधुनिक  बोधकथाएँ. ७ -

" मैं  संसदताई । "






"लोकशाही  को  ठोकशाही   बनाने  की  ली   है  ठान..!!
अय आम जनता, भाड़  में जा,तुं  और तेरा लोकजाल..!!"

एक स्पष्टता- इस बोधकथा का, अपने  देश  की  लोकशाही  से कोई  लेना-देना  नहीं  है ।

=====

" मैं  संसदताई । "

( दरवाज़ा- "ठक-ठक,ठक-ठक,ठक-ठक ")

संसदताई-" आती  हूँ  बाबा, ये  सुबह-सुबह  ११  बजे  कौन  आ धमका..!! कौन  है ?"

लोकजाल-" संसदताई, मैं  लोकजाल..!!"

संसदताई-" कौन ?" 

लोकजाल-" लो..क..जा..ल..अ..!!"

संसदताई- (चिढ़ते हुए)" क्या है? तुम्हें  और  कोई  काम  नहीं  है क्या ? मेरे   पुराने   ठोकसभा  घर  से  तुझे  सहीसलामत  निकाला  तो  अब,  यहाँ   रोगसभा  में  भी  आ  धमका ? क्यूँ आया  है  यहाँ ? क्या  है ?"

लोकजाल- "कुछ  नहीं  ताई..!! मुझे  तो  अण्णा ने  भेजा  है..!!"

संसदताई-"अरे...!! फिर  अण्णा?  कौन  अण्णा..कहाँ   के  अण्णा ?"

लोकजाल-" संसदताई,  वह  अण्णा,  अण्णा   हजारेवाले  अण्णा..!!"

संसदताई- " अरे..!! कायका  हजारे, कहाँ  का  ह..जा..रे..!!  सौ - दो सौ  लोगों  को  इकट्ठा  करने  से, कोई   हजारे  बन  जाता  है क्या ?"

लोकजाल-"ताई, आप  अण्णा  को  कम  आंक  रही  है, क़रीब एक  लाख़  लोगों  ने, उनके  साथ  जेल  जाने  के  लिए  अपने नाम  दर्ज  करवाये  हैं..!!" 

संसदताई-" बस..!! सिर्फ  एक  लाख़ ? मैनें  तो  सोचा  था  ८० करोड़  लोग  नाम  दर्ज  करवायेंगे..!! सा..ले, भिख़ारी कहाँ के..!! लगता है, सभी  लोगों  को, अब  जेलख़ाने  की  रोटीयां  पसंद  आने  लगी  है..!! खैर,  ये  बता, मेरे  रोगसभा  के  यह  दूसरे  घर  पर  अभी  तुं  क्यों  आया है ? अब क्या  काम  है ?"

लोकजाल-"संसदताई, आपके  घरवाले  सभी  दल  के  सांसदो ने, झूठमूठ  का  हंगामा  मचा  कर,  मुझे  ख़ाली  हाथ  वापस  लौटा दिया  है..!! आप  उनको   बराबर  डाँटिएगा..!!"

संसदताई-" क्यों  भाई..!! मैं  उन्हें  क्यों  डाँटूं ?  मैं,  क्या  तेरी, नानी  लगती  हूँ ? चल, भाग  यहाँ  से  साले..!! मेरी  इंदिराताई  के   पोते   राहुल  को  तुमने, विरोधीयों  के  साथ  मिल  कर, खून  के  आंसु  रूलाया  है  और  अब  तुम  ये  चाहते  हो  की,  मैं तुम्हारी  मदद  करूँ, भाग  यहाँ  से..!!"

लोकजाल- " ताई,  मैंने  कुछ  नहीं  किया..!!"

संसदताई-" अबे  साले  अब  भोला  बनता  है ? (रोती सूरत बनाकर) मेरी   इंदिराताई   के   नन्हे-मुन्ने  मासूम   पोते  ने,  ज़िंदगी  में  पहली  बार..पहली  बार, सांसदो  से,  तेरे    लिए..सा..ले..तेरे  लिए , बंधारणीय   दरज्जा   माँगा  था,  सब ने  मिल  कर  उस दरज्जे  की  माँग  को  दरवाज़ा  दिखा  दिया? अब  उसकी   इंदिराताई   नहीं   है, इसीलिए  सब   मेरी   इंदिराताई  के  भोले  बेटे  को   ऐसे  सता  रहे  हो  ना ?"

लोकजाल-" हैं..ई..ई..!! ये  क्या  कह  रही  हैं  संसदताई..!!"

संसदताई-" क्यों ? लग  गई  ना  पिछवाड़े  मिर्ची ? याद रखना  हमारे  बेचारे  मासूम  पोते  का  कहा  अगर  किसी ने  भी,  न  माना  तो, मैं   बारबार-लगातार, तुझे  और  तेरे  अण्णा-फण्णा, जो  भी  है..!! सब  को  ख़ून  के  आसुं  रूलाती  रहूँगी..!! सालों...कमीनों, तुम  सब  इसी  बर्ताव  के  लायक  हो..!! नालायक, चल  अब  फूट  ले यहाँ  से..!!"

(" धड़ा..म..अ.अ.अ..!!" दरवाज़ा बंद ?)

लोकजाल-" औ...फौ..औ..औ..!! संसदताई  तो  हम पर ही बिगड़  गई..!! इस  बात  को  क्या  संसदताई  और  हमारे  सारे  प्रातःस्मरणीय,  कर्तव्यनिष्ठ  माननीय (?) सांसदो  की  ओर से हमें, नये  साल  की   मूल्यवान  सौगात  समझे  क्या ? और... नये  साल  के,  इस  मूल्यवान  फ्लॉप  उपहार  का, अब  हम  सब क्या  करेंगे?"

=====

दोस्तों, "अब हम सब क्या करेंगे?" इस सवाल का आपके पास कोई जवाब है ? है  तो   फिर  बताईए..ना..आ..प्ली..ई..ई.. झ!!

आधुनिक बोध- नये साल पर मिलनेवाला हर उपहार काम का हो ये ज़रूरी नहीं है, ख़ास कर के हमने जिन पर अनहद भरोंसा  किया  हो?


मार्कण्ड दवे । दिनांकः ३०-११-२०११.   

शनिवार, 17 दिसंबर 2011

उड़ती धूप -`गॅ पार्टी ।` लघु वार्ता(वि)लाप..!!








उड़ती  धूप -`गॅ पार्टी ।`
लघु  वार्ता(वि)लाप..!!


"उम्र की उड़ती  धूप, तुम्हें  छू कर निकल  गई  क्या?
 अब सुखाते  रहना तुम, ओस की गीली आवाज़  को..!!


* उम्र के  सारे  पड़ाव, इन्सान  को  जब  उड़ती  धूप  के समान लगने लगते  हैं तब, उसे यह  बात  समझ  में  आती  है  कि, ज़िंदगी  में  अनुभव की  कमी  की  वजह  से, नादान  ओस  की  मासूम  नमी  भरे  तानें (कटाक्ष)  सुखाते  समय, कभी कभार  ऐसी  आवाज़ें, इन्सान  को  विनाश  की  राह  पर  भी  ले  जा  सकती  हैं । (बच  के  रहना, रे...बा..बा..!!)  

=======

" माँ, यह  उड़ती  हुई  धूप  मुझे  तो  बहुत  अच्छी लगती है..!! देखो..ना..!! सुबह  यहाँ, दोपहर  मेरे सिर पर और  शाम  को? शाम  को  इस  तरफ..!! माँ, आख़िर  यह  धूप  कैसे  उड़ती  होगी..!!

" क्या बात है  बेटे..!! मेरा बेटा बड़ा हो कर, बहुत बड़ा साहित्यकार बनेगा क्या, अभी से इतनी बड़ी-बड़ी बातें सोचने लगा है?"

" नहीं माँ, मैं तो बड़ा हो कर हैं..ना..!! ह...अ..म्‍....बता दूँ..!! मैं तो है ना...!! मैं  पुलिसवाला बनुंगा और फिर जो कोई भी इस उड़ती धूप के साथ नहीं भागेगा उनको,  पकड़-पकड़ कर  मैं,  जेलख़ाने  में  बंद  कर  दूँगा..!! बहुत मज़ा आयेगा ।"

=====

" सर, आज  कोई  नया  कैदी  आया  है, कहाँ  डालूँ?"

"कित्ते  साल  का  है? क्या  चार्ज  लगाया  है?"

" साहब, किसी फार्म हाउस पर, गॅ पार्टी  में  हाथापाई  का  कुछ  लफ़ड़ा  कियेला  है  और  उम्र तो  सिर्फ  अट्ठारह साल  की  लगती है..!!"

"ठीक  है, डाल  दे  उसे  चार नंबर में, उन  दो  बुड्ढों  के  साथ ..?"

" सा`ब, चार नंबर में? वह   मासूम  लड़की  पर बलात्कार  करने  वाले, दो  बदमाश  बुड्ढों  के  साथ?"

" अरे, हाँ..हाँ  वही..!! सा...ले, इसे  देख कर  जलते रहेंगे  और  हाँ  जल्दी  करना, अदालत  का  वक़्त  हो गया  है, वहाँ  भी  तो  टाईम  पर  पहूँचना  है..!!"

"ठीक  है  सा`ब । अभी  आया  मैं..!! चल  अबे, यहाँ-वहाँ  क्या  देखता है, अपने  अब्बु  की  बारात  में  आया  है  क्या?" 

=======

" अरे  या..र, तु  दिखता  तो  है  सिर्फ  इतना  सा..!! अब  बता, बाहर  क्या  गुल  खिला  कर  अंदर आ..या..है..इ..इ..!!"

" क..अ..क..अ..क..अ..कुछ  न..हीं..!!"

" अ..बे, सीधी  तरह  बताता है  कि, दूँ  एक  उल्टे  हाथ  की..!! ब..ता  सा..ले? बोलता  है  की  नहीं..बता?"

" मैंने  कुछ  नहीं  किया..!! मैं तो पहली बार गॅ पार्टी में गया और सब मेरे से  ज़बरदस्ती करने  लगे  तो,  मेरा  हाथ  उठ  गया, मैं बिलकुल  निर्दोष  हूँ..!!"

" क्या..बे..हमको ऐड़ा समझता है क्या? अच्छा, तु  तो  गॅ पार्टी वाला है ना? अरे यार..!! ये तो वही च ना, जिस में एक मर्द..दूसरे मर्द के सा..थ..? आ..ई..ला, ही...ही..ही..ही..आ..ई..ला, ही...ही..ही..!! चल, हम  भी आज तेरे साथ, गॅ पार्टी-गॅ पार्टी  खेलेंगे ।"

"क्या..आ..आ? न..हीं..ई..ई..ई..!!"

" चल बे मजनू,  देख  क्या  रहा  है? कस  के  पकड़  साले  को, आज मासूम  लड़की  नहीं  तो, लड़का ही  स..ही..!!"

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" माँ तुम कहाँ हो? देख, तुम मेरी फ़िक्र  मत करना..!! उड़ती धूप का साया, अब ढलने को है और अब तो मुझे कोई दर्द भी महसूस नहीं होता..!!"
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प्यारे दोस्तों, क्या आप को दर्द महसूस  हो   रहा  है?

मार्कण्ड दवे । दिनांक-१५-१२-२०११.

मंगलवार, 29 नवंबर 2011

तबीब कसाई हो गए? (व्यंग गीत ।)




तबीब  कसाई   हो   गए? (व्यंग गीत ।)



चेहरे    की   चमक,   तेरी  जेब   की  खनक,

सब   कुछ  देखो,  हवा  -  हवाई   हो   गए..!!

मुफ़्त   में   तबीब   ये  बदनाम   हो    गए  ?

जब   से   तबीब, इलीस  कसाई   हो   गए ?  

इलीस =  धर्म  मार्ग  से  भ्रष्ट, शैतान )


  अंतरा-१.


इन्सानियत   की   तो,   ऐसी   की   तैसी..!!

साँठ - गाँठ   है   ज़िंदा,   वैसे    की   वैसी..!!

नेता - बीमा - लेब,  सब  लुगाई   हो   गए..!!

जब  से   तबीब, इलीस  कसाई   हो   गए ?  




अंतरा-२.


कौन    अंग   दायाँ,  कौन   सा   है    बायाँ..!!

कौन    यहाँ     बच्चा,   कौन    यहाँ    बुढ़ा..!!

हाड़ - मांस    पिघल   के,  दवाई   हो   गए..!!

जब   से   तबीब,  इलीस  कसाई   हो   गए ?  


अंतरा-३.



कहाँ    है    ग़रीबी,  कहाँ   के   तुम  ग़रीब..!!

गुर्दे की  क़िमत  सुन, खुल  जाएगा नसीब..!!

बदन  -  दवा   -  दारू,   महँगाई   हो   गए..!!

जब   से   तबीब,  इलीस  कसाई   हो   गए ?   


(गुर्दा = कीडनी)



अंतरा-४.


कहाँ   के   ये   ईश्वर,  कहाँ   के   ये   गोड़..!!

ऐंठे  -  जीते  -  मरते,   है   सब   गठजोड़..!!

अस्पताल    सोने   की    खुदाई   हो  गए..!!

जब   से   तबीब, इलीस  कसाई   हो   गए ?   


अंतरा-५.


तुलसी  -  हलदी  -  हरडे,  अनर्थ  हो   गए..!!

ग्रंथ    ये    पुराने,  सब    व्यर्थ    हो   गए..!!

माँ   के   सारे    नुस्खे    दंगाई   हो   गए..!!   


तब  से  तबीब, इलीस  कसाई  हो  गए ?

(दंगाई =  उपद्रवकारी)

मार्कण्ड दवे । दिनांक - २७ -११ - २०११. 

शनिवार, 26 नवंबर 2011

ख़ुदगरज लीडर । (व्यंग गीत ।)







ख़ुदगरज  लीडर । (व्यंग गीत ।)


ख़ुद    से   भी  ख़ुदगरज  होते  हैं  लीडर ।

ख़ुद   को   ही  ख़ुदा  समझते   हैं   चीटर ।


अंतरा-१.


धन - दौलत  के  चंद  टूकड़ों   की  ख़ातिर,

हर   पल  ज़मीर   से   झगड़ते   हैं   लीडर ।

ख़ुद   को   ही  ख़ुदा  समझते   हैं   चीटर ।


अंतरा-२.


जन्नत  हथिया  कर, ईमान  दफ़ना  कर, 

जन्नत को जहन्नुम,  बदलते   हैं  लीडर ।

ख़ुद   को   ही  ख़ुदा  समझते   हैं   चीटर ।


अंतरा-३.


मर कर  जी  रहे  हम, जी लिया अब जी भर,

लहू     लोगों    का    खूब   पीते   हैं  लीडर ।

ख़ुद   को   ही   ख़ुदा   समझते   हैं   चीटर ।



अंतरा-४.



रूहें   दबा   कर,  जिस्मों   को  कूचल  कर,

तिजारत,   लाशों    की    करते   हैं   लीडर ।

ख़ुद   को   ही   ख़ुदा   समझते   हैं   चीटर ।

(तिजारत=व्यापार)


अंतरा-५.


ख़ुदा   को    ख़तावार, खुलेआम  कह  कर, 

ख़ुदा    से    भी   बदला   लेते   हैं   लीडर ।

ख़ुद   को   ही  ख़ुदा  समझते   हैं   चीटर ।


ख़ुद    से   भी   ख़ुदगरज  होते  हैं  लीडर ।

ख़ुद   को   ही   ख़ुदा  समझते   हैं   चीटर ।


मार्कण्ड दवे । दिनांक-२६-११-२०११.

शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

गधे पर शेर...


मेरे पिछले पोस्ट में मजबूरी वश मुझे प्राप्त सवाल का जवाब ही पोस्ट कर सका क्योंकि सवाल मेल से मिट गया था.
अब वही सवाल मेरे पास फिर आ गया है, इसलिए सवाल और जवाब दोनों पोस्ट कर रहा हूँ.

सवाल था गधे पर फोटो देख कर शेयर लिखिए.
और प्रेषक का शेर भी साथ था --
देखिए फोटो, पढ़िए शेर और फिर मेरा जवाब... शायद अब तालमेल भाए..



प्रेषक का शेर...

हर समंदर में साहिल नहीं होता,

हर जहाज पे मिसाइल नहीं होता,
अगर धीरुभाई अम्बानी नहीं होता,
तो - हर गधे के पास मोबाईल नहीं होता |


मेरा जवाब ....


Sahi hai bhai,
सही बात है भाई !!!!!
Aaj har gadhe ke paas mobile hota hai,
आज हर गधे के पास मोबाईल होता है,
par kya har mobile wala gadha hota hai?
पर क्या मोबाईल वाला गधा होता है?
Agar haan to sochye !!!!!!*
अगर हाँ तो सोचिए,
waqt padne par gadhe ko bhi baap banana padta hai,
वक्त पड़ने पर गधे को भी बाप बनाना पड़ता है,
kya waqt aane par "baap ko bhi ........................"?
क्या वक्त आने पर बाप को भी "........................................."?

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