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मंगलवार, 31 मई 2011

अंकल, हम बेवकूफ नहीं हैं ...

11 वर्षीय रोहन और उसके पड़ोस में रहने वाली 10 सलोनी को साथ-साथ खेलते हुए यह एहसास हो जाता है कि वे एक-दूसरे से बेहद प्यार करते हैं, और उन्हें शादी कर लेनी चाहिए...

रोहन सलोनी के पिता के पास पहुंच जाता है, और हिम्मत जुटाकर कह डालता है, "मिश्रा अंकल, मैं और आपकी बेटी सलोनी एक-दूसरे से प्यार करते हैं, और मैं आपसे शादी के लिए उसका हाथ मांगने आया हूं..."

मिश्रा जी को नन्हे शरारती रोहन की हरकत बेहद प्यारी लगती है, और वह डांटने के बजाए मुस्कुराते हुए रोहन से पूछते हैं, "यार, तुम अभी सिर्फ 11 साल के हो, और तुम्हारे पास घर भी नहीं है... तुम और सलोनी रहोगे कहां...?"

रोहन तपाक से कहता है, "सलोनी के कमरे में, क्योंकि वह मेरे कमरे से बड़ा है, और वहां हम दोनों के लिए ज़्यादा जगह है..."

मिश्रा जी को अब भी रोहन की इस मासूमियत पर प्यार आता है, और वह फिर पूछते हैं, "ठीक है... लेकिन तुम लोग गुज़ारा कैसे चलाओगे... आखिर इस उम्र में तुम्हें नौकरी तो मिल नहीं सकती...?"

रोहन फिर बहुत शांत स्वर में जवाब देता है, "हमारा जेबखर्च है न... उसे 100 रुपये प्रति सप्ताह मिलता है, और मुझे 150 रुपये प्रति सप्ताह... इस हिसाब से हम दोनों के लगभग 1000 रुपये हर महीने मिल जाता है, जो हमारी ज़रूरतों के लिए काफी रहेगा..."

मिश्रा जी इस बात से भौंचक्के रह जाते हैं, कि रोहन ने इस विषय पर इतनी गंभीरता से, और इतनी आगे तक सोच रखा है...

सो, वह सोचने लगते हैं कि ऐसा क्या कहें कि रोहन को जवाब न सूझे, और उसे इस उम्र में सलोनी से शादी न करने के लिए समझाया जा सके...

कुछ देर बाद वह फिर मुस्कुराते हुए रोहन से सवाल करते हैं, "यह बहुत अच्छी बात है, बेटे, कि तुमने इतनी अच्छी तरह सब प्लान किया हुआ है, लेकिन यह बताओ, कि अगर तुम दोनों के बच्चे हो गए, तो क्या यह जेबखर्च कम नहीं पड़ेगा...?"

रोहन ने इस बार भी तपाक से जवाब दिया, "अंकल, हम बेवकूफ नहीं हैं... जब आज तक नहीं होने दिया, तो आगे भी .........."

9 टिप्पणियाँ:

बाप रे ! बच्चे है या ......

बड़े ही शैतान बच्चे है ...

कार्टून बहुत ही अच्छा लगते है आप ! क्या खुद बनाते है !

श्रीगजेन्द्रजी,

हम भी बेवकूफ नहीं हैं?

आप क्या कहना चाहते हैं,हम सबकुछ समझते हैं?

हा..हा..हा..हा..!!

उफ़ …………हद है बच्चे हैं या बाप्।

कमाल के बच्चे हैं..

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