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शनिवार, 7 मई 2011

Old ,नशा-Gold,प्रेम पत्र । PART-2

Old ,नशा-Gold,प्रेम पत्र । PART-2


मेरा लिखा,स्वरबद्ध किया,संगीतबद्ध किया और स्वरायोजन श्रीप्रसून चौधरी, प्रख्यात गायिका सुश्रीपारूलजी द्वाया गाया हुआ ये गीत मेरे ब्लॉग पर आकर सुनिए और बताईएगा ज़रूर,  आपको गीत कैसा लगा?

गीत के बोल हैं,

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"पुराने  ख़तों  की  खुश्बू  में  यादें  भरी  हैं  मेरी,
आपको दिखा नहीं सकती,शादी हो गई है मेरी ।
दिलबर ने  मुझे दिए थे जो,घर में छिपे पड़े हैं जो,
मैं  ख़ुद पढ़ नहीं सकती, शादी हो गई  है  मेरी ।"

मेरा ब्लॉग-

http://mktvfilms.blogspot.com/2011/05/old-gold-part-1.html

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सन-१९७० से पहले, प्रेम पत्र भेजने के लिए कई बार सात-आठ साल के छोटे बच्चों को, सब से सलामत दूत माना जाता था । हालाँकि, इसमें कई जोखिम होते थे..!!
 
सन-१९६२-६३ में, मेरे जन्म स्थल-दर्भावती (डभोई) में हमारी गली में रहनेवाले एक युवक ने, मुझे छोटा बच्चा मान कर, हमारे पड़ोस में रहने वाली एक लड़की को देने के लिए, मुझे एक प्रेम पत्र थमा दिया ।
 
इस लड़के से मैं बहुत डरता था, इसलिए मैं उसे मना कर न सका, अतः उसका दिया हुआ प्रेम पत्र, लुकाते छुपाते उस लड़की तक पहुंचा आया । परंतु, मैंने उस लड़के को,उस दिन पहली बार, बिना डरे कह दिया कि," आज के बाद मैं ऐसा कोई काम नहीं करुंगा ।" 

हालांकि, उसकी ज़रूरत भी न पड़ी..!! पता नहीं, उस लड़के ने, प्रेम पत्र में न जाने क्या लिखा था कि, उसकी प्रेमिका उससे ऐसी रूठ गई कि, उसको चारा डालना ही बंद कर दिया..!!
 
थोड़े ही दिनों में, प्रेमिका की उपेक्षा से, वह लड़का देवदास जैसा बर्ताव करने लगा । फिर से, एक दिन वह युवक मेरे पास आया और फिर से एक कागज़ मेरे सामने रख दिया । उसके पास कागज़ देखते ही, मैंने उसे बिना शर्म किए कह दिया," तेरा ऐसा कोई काम, मैं नहीं करुंगा..!!
 
यह सुनकर, उस `देवदास` युवक ने कहा,"मैं, ये कागज़ उस लड़की को पहुंचाने के लिए तुझे नहीं दे रहा हूँ, सिर्फ तु इसमें दस्तख़त कर दे, बस..!!"
 
मैनें एहतियात के तौर पर पूछा," क्या लिखा है इस में?"
 
गहरी सांस भर कर, वह लड़का बोला,"मेरी लवर के पिताजी के नाम, एक अर्जी लिखी है कि, उनकी बेटी को समझा के, उससे मेरा प्रेम विवाह तुरंत करा दे ।"
 
यह सुनकर तो मानो, मेरे मन में ख़तरे की घंटीयाँ बज ने लगी..!! मुझे पक्का लगा कि, उस देवदास के साथ-साथ, आज मेरी पिटाई भी तय है, अब क्या करूँ? ऐसी ही असमंजस की मनःस्थिति में, मारे डर के, मैंने अपने स्कूल का बस्ता दोनों हाथ से कस कर पकड़ा और पिछे मुड़ कर देखे बिना ही, वहाँ से ऐसा भागा मानो मेरे पिछे, कोई पागल कुत्ता पड़ा हो..!! भागता हुआ जब, मैं अपने घर पहुंचा, तब जा कर, मेरे दिल को ज़रा शांति मिली ।

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Old ,नशा-Gold,प्रेम पत्र । PART-2

हालांकि, मेरा डर सही था और दस्तख़त न करने का फैसला भी..!! इसी रात हमारे महोल्ले में, उस लड़की के पिता और उसके महाबली खली जैसे लट्ठ भाई ने मिलकर, उस देवदास प्रेमी को इतनी बुरी तरह पिटा कि, उसकी सात पुश्तें भी प्रेम का नाम लेना भूल जाएं..!! अर्जी कर्ता देवदास प्रेमी की बेरहमी से धुलाई होती देखकर, मैं छोटा बच्चा होते हुए भी, बिना दस्तख़त किए,सही समय पर, पलायन करने के अपने आप के फैसले पर, मैंने बहुत गर्व महसूस किया..!!

थोडे ही दिनो बाद, मामला थोड़ा शांत होते ही,मेरे मिलने पर, उस लड़के ने मुझे कहा,"सब को तेरे जैसे, होशियारी से, लुकाते-छुपाते पत्र पहुंचाना थोड़े ही आता है, इसी लिए मुझे इतनी मार पड़ गई?"

कुछ  प्रेमी,अपना प्रेम संबंध ध्वस्त हो जाने के बाद भी प्रेम पत्रों को अपने प्राण से भी अधिक जतन से जीवन भर संभालते हैं, जब कि कुछ  समझदार-व्यवहार कुशल प्रेमी  मन में,`रात गई बात गई` जैसा कुछ बड़बड़ाकर, उसे फाड़ कर या जला कर अपनी दुखद यादों को मिटाने का व्यर्थ संघर्ष करते रहते हैं ।

हालाँकि, पुराने प्रेम पत्र को आजीवन संचय करके, छुपाने वाले प्रेमीओं के प्रेम पत्र, किसी के हाथ लग जाने पर,उनके संसार में उन्हें, सुनामी जैसी महान आपदा झेलनी पड़ सकती है ।

R.K.FILMS, राज कपूर की अत्यंत सफल फिल्म-`संगम` में, राजेन्द्र कुमार ने, वैजयंती-माला को लिखा हुआ, ऐसा ही प्रेम पत्र शादी के पश्चात राज कपूर के हाथ लग जाने के बाद मचे आशंकाई-मनोमंथन में, रिश्तों को बचाने की जद्दोजहद में आखिर राजेन्द्र कुमार को आत्मघात करना पड़ता है ।

संगम का एक गीत था," ये मेरा प्रेम पत्र पढ़ कर, के तुम नाराज़ ना होना ।" हालाँकि, नाराज़गी तो जन्म लेती है,पर राज कपूर के दिल में..!!

पौराणिक प्रेम पत्र ।

पौराणिक प्रेम पत्र की चर्चा में, रामायण और भागवत के प्रसंग की चर्चा न हो, ये तो हो ही नहीं सकता..!!

* श्रीरामचरित मानसजी के,बाल कांड में, गुरुवर ॠषि विश्वामित्रजी की आज्ञा को शिरोधार्य करके,श्रीरामचंन्द्रजी जब शिव धनुष उठाने के लिए आगे बढ़े तब,

"प्रभुहि चितई पुनि चितव महि राजत लोचन लोल ।
खेलत मनसिज मीन जुग जनु बिधु मंडल डोल ॥"

अर्थात- कुछ क्षण के लिए श्रीरामचंन्द्रजी के सामने और कुछ क्षण के लिए लज्जा के कारण सिमट कर धरती को निहारते हुए, सीताजी के चपल नयन,मानो चंद्र मंडल में कामदेव के ध्वज समान दो मीन खेल रही हो ऐसे शोभते हुए,श्रीराम को मनोमन प्रेम का संदेश देने लगे ।

* श्रीमद् भागवत महापुराण अनुसार, सारे संसार में, सर्व प्रथम लिखित प्रेम पत्र, रूक्मणीजी ने श्रीकृष्ण को लिखा था..!!

राजा भिष्मक की पुत्री रूक्मणीजी को जब पता चला कि, उसका भाई रूकमी और पिताजी,उसका विवाह बुंदेलखंड के,चेदी राज्य के  राजा शिशुपाल से करना चाहते हैं,तब सुनंद नामक विश्वासु ब्राह्मण दूत के हाथों, एक प्रेम पत्र भेज कर रूक्मणीजी ने, भगवान श्रीकृष्ण से अपना प्यार अभिव्यक्त करके, खुद को वहाँ से ले जाने का आग्रह किया था..!!

* तद्उपरांत, विदेश के साहित्य में भी, विलियम शेक्सपियर के सोनेट में वर्णन कि गई भावपूर्ण संवेदना, प्रेम पत्र का, शायद सर्वश्रेष्ठ आदर्श प्रारूप है ।

* नेपोलियन बोनापार्ट (१७६३-१८२१) ने अपने जीवनकाल में करीब ७५००० प्रेम पत्र लिखे थे, जिन में ज्यादातर सन-१७९६ में शादी के बाद अपनी सुंदर पत्नी जोसेफाइन को संबोधित किए गए थे ।

नेपोलियन का एक प्रेम पत्र- "पेरिस-१७९५."

" आज मैं तुम्हारे ही ख्यालों के साथ जागा । तुम्हारे साथ गुज़ारी हुई कल की मादक शाम की, तेरी नशीली तस्वीर ने मेरे मानसपटल पर भावनाओं की तूफ़ानी हलचल मचा दी है । मेरी मीठी,अद्वितीय जोसेफाइन, मेरे दिल में ये क्या हो रहा है..!! तेरे नशीले होठ और हृदय से छलकता हुआ प्यार, मुझ में असहनीय जलन पैदा कर रहे हैं..!! आह..!! तुम, तुम्हारे बाह्य व्यक्तित्व से कितनी भिन्न हो, ये बात मैं कल रात को ही जान सका..!! प्रिये, मेरी ओर से हज़ारों चुंबन के साथ, ये शर्त पर मैं इस पत्र का समापन कर रहा हूँ कि, तुम  मेरे सारे चुंबन, मुझे वापस नहीं करोगी..!!"

दोस्तों,इसे पढ़कर कौन कह सकता है कि, युद्ध मैदान में क्रूरता पूर्ण तरीके से लड़ने वाले योद्धा, कभी संवेदनशील नहीं होते?

आधुनिक प्रेम पत्र ।

अब आधुनिक प्रेम पत्रों के बारे में क्या कहना? उसकी गुणवत्ता और स्तर को दर्शाने के लिए, ये एक ही उदाहरण पर्याप्त है, चलो देखें?

कुछ साल पहले, रूपये-पैसे से सुखी, मेरे एक मित्र का, फिल्मी हीरो जैसा दिखने वाला सुंदर पुत्र, जो कि कॉलेज के प्रथम वर्ष में अभ्यास कर रहा था, घर में किसी को बिना कुछ बताए, अपने पड़ोस में रहती, उसकी बचपन की गर्लफ़्रेंड के साथ कहीं भाग गया..!!

कॉलेजियन हीरो के पिता के साथ झगड़ा करके, भगोड़ी कन्या सग़ीर होने का दावा कर के कन्या के पिता ने, मेरे मित्र के फिल्मी हीरो-बेटे पर, अपनी बेटी का अपहरण करने का इल्ज़ाम लगाकर, दोनों को चौबीस घंटे में हाज़िर करने की या फिर फौज़दारी, सख़्त कानूनी कार्यवाही करने की धमकी दी ।

इस धमकी से डर हुए मेरे मित्र ने, सहायता एवं विचार विमर्श करने के लिए, तुरंत मुझे बुलवा लिया । वैसे यह बात जानकर मुझे बड़ी हैरानी हुई क्योंकि, वह कॉलेजियन हीरो के साथ मेरी अच्छी दोस्ती थी और मुझे पता था कि, हीरो को, ये कन्या शादी के लिए कतई पसंद न थीं..!! बाद में मैंने सोचा,"भाई, आजकल के युवाओं का कोई भरोसा नहीं, आज लड़की नापसंद है-कल पसंद भी हो जाए?"

हालाँकि, दूसरे दिन शाम को दोनों प्रेमी पंछी, उनके दोस्त के यहाँ से पकड़े गए, मेरे मित्र ने दोनों को समझाने के लिए, मुझे फिर से बुलवा लिया । अब इस में, मैं  क्या कर सकता था?

करीब तीन-चार घंटे तक दोनों परिवार के बीच,आक्षेप-प्रतिआक्षेप, वादविवाद और तनाव चलता रहा । बाद में मेरी जिज्ञासा,चरम सीमा पार हो जाने के कारण, वह भगोड़े युवा दोस्त को मैंने आखिर पूछ ही लिया,

" अरे, या..र,जब शादी के लिए तेरी ये गर्लफ्रैंड, तुम्हें नापसंद थी, तो फिर उसके साथ भागा क्यों और वो भी `TWO DAYS -ONE NIGHT STAY` के पैकेज तक?"

दोनो परिवारों के झगड़े की वजह से हैरान-परेशान हीरो प्रेमी, बड़े व्याकुल मन से बोला,"अंकल, मैं उसे कुछ भाव न देता था इसलिए, उस घमंडी लड़की ने मुझे प्रेम पत्र भेजा, जिस में उसने मुझे `हिजड़े` की गाली दी थी,ये रहा वह प्रेम पत्र..!!

प्यारे दोस्तों, आपका मत क्या है? क्या सिर्फ एक गाली के बदले में, उस प्रेमी को अपनी  गर्लफ्रैंड के साथ इतना घिनौना बदला लेना,आपको सही लगता है? आपके मत अनुसार प्रेमी हीरो के साथ कैसा व्यवहार होना चाहिए? दोनों प्रेमी पंछी की शादी करवा देनी चाहिए?

इसके आगे क्या हुआ? क्या घमंडी  प्रेमिका के पिता ने, उस प्रेमी युवक पर फौजदारी केस दर्ज किया ? क्या दोनों परिवारों में सुलह हुई?

आगे क्या हुआ जानने के लिए,इस आलेख का तीसरा और अंतिम रोचक हिस्सा, कल यहीं पर पोस्ट होगा, कृपया आपको कल यहीं पर आने की फिरसे जहमत उठानी पड़ेगी..!!


मेरा ब्लॉग-
http://mktvfilms.blogspot.com/2011/05/old-gold-part-1.html

मार्कण्ड दवे । दिनांक-०५-०५-२०११.

10 टिप्पणियाँ:

अरे वाह , सभी के प्रेम पत्र पढ़वा दिये है आपने ....

बढ़िया किया जो दस्तखत नहीं किया , नहीं तो ....

बहुत बढ़िया लिखा है

बहुत दिनो के बाद आना हुआ इस मंच पर ॥ अच्छा लेखन चल रहा है इस मंच पर ॥ बधाई

बहुत बढ़िया अच्छा लगा

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